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देश के आर्थिक विकास का “स्वदेश एकोनॉमिक मॉडल”

“स्वदेश व्यापार मंडल” द्वारा विकसित किये गए बेहद लाभकारी “स्वदेश एकोनॉमिक मॉडल” का परिचय संक्षेप में (विस्तृत मॉडल जानने के लिए आप हमसे मॉडल की बुकलेट मंगा सकते हैं) – विश्व के प्रत्येक देश का विकास या तरक्की जहां से …

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आप सारी जिन्दगी इस गांव में देवता की तरह पूजे जायेंगे (“मिशन डिफीट द हंगर”)

आइये हम पहले आप को एक गांव की उस विभत्स दशा को बताते है जहां सैकड़ों परिवार इसी जिन्दगी की क्रूरता को प्रतिदिन जीते है।  सबसे पहले आप अपने घर के अन्दर एक नजर डालिये, आपके घर में खाने के लिए …

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हर व्यापारी की आय दो गुनी हो यही हमारा लक्ष्य है

 व्यापार एक ऐसा शब्द है। जो अत्यन्त व्यापक रूप में है। जिसमे रॉ मेटेरियल, प्रोडक्शन, मार्केटिंग, और भी बहुत कुछ आता है।ऐसे में  व्यापारी को हर पहलू पर सतर्क और सजग रहना पड़ता है। जरा सी असावधानी गलत परिणाम का …

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बनाए देश को लोकल से ग्लोबल

व्यापारी भाइयों , अगर हम भारत को विश्व का नंबर 1 राष्ट्र बनाना चाहते है तो यह आवश्यक होगा कि हम अब जिन वस्तुओं को विदेशियों से मंगाते है उनका न केवल अपने देश में ही निर्माण करे बल्कि उसकी …

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करें तैयारी अपने व्यापार को विश्व पटल पर ले जाने की

बहुत सारे देशों के व्यापारी हमारे देश में, हमारे जिले में अपना सामान बेचते है और हमारी पूँजी को अपनी ढ़ेर सारी प्रॉफिट के साथ हमसे छीन लेते है। वही पर जब हम अपने व्यापार के विस्तार के बारे में सोचते …

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अपनी भारत माँ की ये मुस्कान वापस लानी है

आज हमारे देश का प्रत्येक व्यक्ति चाहे वो महिला हो पुरुष चाहे वो बच्चा हो या बुजुर्ग सभी अपने आत्म-सम्मान, अपने इगों के साथ जीते है।  आजादी के पहले आत्म-सम्मान कही था ही नहीं। प्रशासनिक क्षेत्र में सारे बड़े अधिकारी …

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हमारी सबसे बड़ी धरोहर का तो प्रयोग ही नहीं किया हमने

हमारे देश की जनसंख्या विश्व में दूसरे स्थान पर है। ये कुदरत का एक ऐसा उपहार है जो आज अभिशाप में बदल गया है , आर्थिक रूप से विकास करने के लिये अर्थव्यवस्था में दो सबसे मुख्य तथ्य (टूल्स ) आवश्यक …

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उन सपूतों के बलिदान को व्यापार की प्रेरणा बनाते है , जिन्होंने देश के लिए जान दे दी

 कमरें में लगी महान क्रांतिकारियों की फोटो अपलक निहारे जा रहा था। कभी भगत सिंह को देखता तो कभी सुभाष को, ये ही वो भारत माँ के सपूत है जिन्होंने देश आज़ाद कराने में अपने प्राणों की आहुति दे दी। …

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आज़ादी तो मिल गई अब आर्थिक और व्यापारिक रूप से भी बनेंगे सशक्त

देश तो आज़ाद हो गया। पर अर्थव्यवस्था अभी भी गुलामी की ज़ंजीरो से पूरी तरह से मुक्त न हो पायी। ये गुलामी कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी क्योंकि आज भी अपनी मांग की पूर्ति के लिए, हम विश्व की ओर निहार …

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विश्व में पैदा करेंगे अपने उत्पादों की माँग

 हमारा देश अर्थव्यवस्था में आज भी पीछे है । इसका प्रमुख कारण विश्व हमारे उत्पाद की मांग नहीं कर रहा है। हम केवल अपने ही देश की मांग पर निर्भर है। विश्व बाज़ार में हमारे उत्पादों की छवि बढ़े तो …

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